Best Best 98+ Mirza Ghalib Shayari On Love — ग़ालिब की शायरी

Mirza Ghalib Shayari की इस खास Post में पढ़ेंगे मिर्ज़ा ग़ालिब शायरी, (Mirza Ghalib Quotes), Mirza Ghalib Shayari In Hindi 2 Lines, को जो आप के दिल को छू जाएँगी।

आशा करता हूँ की यह पोस्ट आप सभी शेर-ओ-शायरी के चाहने वालो को पसंद आएगी।

दोस्तों जहा भी शेर-ओ-शायरी का ज़िक्र जहा होता वहा सबसे पहले नाम महान शायर मिर्ज़ा ग़ालिब का आता हैं.

ग़ालिब उर्दू शायरी का वह चमकता सितारा हैं जो आज भी आकाश के चमचमाते तारे की तरह चमक रहा।

ग़ालिब परिचय

मिर्ज़ा ग़ालिब का जन्म आगरा में 27 दिसंबर, 1797 को हुआ था। वो एक सैनिक पृष्ठभूमि वाले परिवार से थे. और उनकी पृष्ठभूमि एक तुर्क परिवार से थी।

मिर्ज़ा ग़ालिब का पूरा नाम “मिर्ज़ा असद-उल्लाह बेग ख़ां” उर्फ “ग़ालिब” था। ग़ालिब के बचपन में ही, उनके चाचा और पिता का देहांत हो गया था।

ग़ालिब का अपना जीवनयापन चाचा के देहांत के बाद मिलने वाले पेंशन से होता रहा. बचपन से ही उन्हें कविताये और शायरी का शौख रहा महज अपनी 11 साल की उम्र से ही कविताएं लिखना आरम्भ कर दिया था।

इनकी शादी 13 वर्ष की आयु में नवाब इलाही बक्श की बेटी उमराव बेगम से करा दी गयी. ग़ालिब साहब ने कई जगह काम किया

लाहौर, जयपुर दिल्ली आदि उसके बाद वापस आगरा आ गए और वही रहने लगे ग़ालिब साहब वफ़ात (निधन) 15 फरवरी, 1869 को हुआ. लेकिन आज भी उनका नाम में ज़िंदा हैं।

नमन करते हैं ऐसे महान शायर को जिनके हर एक शब्द जैसे जिंदगी के सार को बयां करती। उनके द्वारा लिखे गए हर एक शेर किसी जिंदादिल आशिक की तरह होते थे।

जो इश्क़-ए-मोहब्बत की हर एक रस्मो को अदा करती थी। यह आश्चर्य की बात न होगी कि इश्क़ ग़ालिब से ही शुरू हुआ। . कमश: ..

दोस्तों तो देर कैसी आईये पढ़ते हैं मिर्ज़ा ग़ालिब की शायरी के उस दमदार कलेक्शन को जो आप के दिलो को छू जाएगी।

Mirza Ghalib Shayari

Ishq Ne Galib Nikamma Kar Diya

🔘
इश्क़ ने ग़ालिब निकम्मा कर दिया।
वर्ना हम भी आदमी थे काम के।।

ghalib shayari on love

🔘
काबा किस मुँह से जाओगे ‘ग़ालिब’।
शर्म तुम को मगर नहीं आती।।

ghalib hindi shayari on love

🔘
दिल-ए-नादाँ तुझे हुआ क्या है।
आख़िर इस दर्द की दवा क्या है।।

Famous ghalib shayari

🔘
इश्क़ पर जोर नहीं है ये वो आतिश ‘ग़ालिब’।
कि लगाये न लगे और बुझाये न बुझे।।

════💦
इन्हें भी पढ़े ◼ [ 245+ Chand Shayari — चाँद पर शायरी ]
════💦 OKK

🔘
इशरत-ए-क़तरा है दरिया में फ़ना हो जाना।
दर्द का हद से गुज़रना है दवा हो जाना।।

ghalib love shayari in hindi

🔘
क़र्ज़ की पीते थे मय लेकिन समझते थे कि हां।
रंग लावेगी हमारी फ़ाक़ा-मस्ती एक दिन।।

मिर्ज़ा ग़ालिब की शायरी

🔘
दर्द मिन्नत-कश-ए-दवा न हुआ।
मैं न अच्छा हुआ बुरा न हुआ।।

2 Line Mirza Ghalib Shayari

🔘
मोहब्बत में नहीं है फ़र्क़ जीने और मरने का।
उसी को देख कर जीते हैं जिस काफ़िर पे दम निकले।।

ghalib shayari urdu

════💦
इन्हें भी पढ़े ◼ [ 274 + दिल शायरी — Dil Shayari ]
════💦 OKK

🔘
हैं और भी दुनिया में सुख़न-वर बहुत अच्छे।
कहते हैं कि ‘ग़ालिब’ का है अंदाज़-ए-बयाँ और।।

Famous ghalib shayari hindi

🔘
कितना ख़ौफ होता है शाम के अंधेरों में।
पूछ उन परिंदों से जिनके घर नहीं होते।।

🔘
न था कुछ तो ख़ुदा था कुछ न होता तो ख़ुदा होता।
डुबोया मुझ को होने ने न होता मैं तो क्या होता।।

ghalib love shayari
ghalib sad shayari

🔘
दर्द जब दिल में हो तो दवा कीजिए।
दिल ही जब दर्द हो तो क्या कीजिए।।

🔘
नज़र लगे न कहीं उसके दस्त-ओ-बाज़ू को।
ये लोग क्यूँ मेरे ज़ख़्मे जिगर को देखते हैं।।

mirza ghalib shayari in hindi 2 lines
mirza ghalib shayari in urdu

🔘
वाइज़!! तेरी दुआओं में असर हो तो मस्जिद को हिलाके देख।
नहीं तो दो घूंट पी और मस्जिद को हिलता देख।।

Shayari Of Ghalib On Ishq

🔘
रही न ताक़त-ए-गुफ़्तार और अगर हो भी।
तो किस उम्मीद पे कहिये के आरज़ू क्या है।।

════💦
इन्हें भी पढ़े ◼ [ 20+ Ghata Shayari काली घटा पर घटा शायरी ]
════💦 OKK

🔘
पियूँ शराब अगर ख़ुम भी देख लूँ दो चार।
ये शीशा-ओ-क़दह-ओ-कूज़ा-ओ-सुबू क्या है।।

Mirza Ghalib Shayari

🔘
चिपक रहा है बदन पर लहू से पैराहन।
हमारी ज़ेब को अब हाजत-ए-रफ़ू क्या है।।

🔘
न शोले में ये करिश्मा न बर्क़ में ये अदा।
कोई बताओ कि वो शोखे-तुंदख़ू क्या है।।

🔘
हुई मुद्दत कि ‘ग़ालिब’ मर गया पर याद आता है।
वो हर इक बात पर कहना कि यूँ होता तो क्या होता।।

🔘
तेरे वादे पर जिये हम, तो यह जान, झूठ जाना।
कि ख़ुशी से मर न जाते, अगर एतबार होता।।

best ghalib shayari

════💦
इन्हें भी पढ़े ◼ [ 107+ Khayaal Shayari ख्याल शायरी ]
════💦 OKK

🔘
रेख़्ते के तुम्हीं उस्ताद नहीं हो ‘ग़ालिब’।
कहते हैं अगले ज़माने में कोई ‘मीर’ भी था।।

🔘
कोई मेरे दिल से पूछे तिरे तीर-ए-नीम-कश को।
ये ख़लिश कहाँ से होती जो जिगर के पार होता।।

🔘
बस-कि दुश्वार है हर काम का आसाँ होना।
आदमी को भी मयस्सर नहीं इंसाँ होना।।

🔘
बाज़ीचा-ए-अतफ़ाल है दुनिया मिरे आगे।
होता है शब-ओ-रोज़ तमाशा मिरे आगे।।

🔘
यही है आज़माना तो सताना किसको कहते हैं।
अदू के हो लिए जब तुम तो मेरा इम्तहां क्यों हो।।

🔘
तुम न आए तो क्या सहर न हुई
हाँ मगर चैन से बसर न हुई।

मेरा नाला सुना ज़माने ने
एक तुम हो जिसे ख़बर न हुई।।

Ghalib Shayari in Hindi

🔘
हुआ जब गम से यूँ बेहिश तो गम क्या सर के कटने का।
ना होता गर जुदा तन से तो जहानु पर धरा होता।।

Shayari Of Ghalib On Ishq

🔘
हर एक बात पे कहते हो तुम कि तू क्या है।
तुम्हीं कहो कि ये अंदाज़-ए-गुफ़्तगू क्या है।।

top mirza ghalib shayari

🔘
ये हम जो हिज्र में दीवार-ओ-दर को देखते हैं।
कभी सबा को, कभी नामाबर को देखते हैं।।

════💦
इन्हें भी पढ़े ◼ [ 198+ Barish Shayari बारिश शायरी ]
════💦 OK

🔘
निकलना ख़ुल्द से आदम का सुनते आए हैं लेकिन।
बहुत बे-आबरू हो कर तिरे कूचे से हम निकले।।

ghalib hindi love shayari

🔘
कहाँ मय-ख़ाने का दरवाज़ा ‘ग़ालिब’ और कहाँ वाइज़।
पर इतना जानते हैं कल वो जाता था कि हम निकले।।

🔘
तेरे ज़वाहिरे तर्फ़े कुल को क्या देखें।
हम औजे तअले लाल-ओ-गुहर को देखते हैं।।

🔘
बना है शह का मुसाहिब, फिरे है इतराता।
वगर्ना शहर में “ग़ालिब” की आबरू क्या है।।

Ghalib Shayari in Hindi Font

🔘
जला है जिस्म जहाँ दिल भी जल गया होगा।
कुरेदते हो जो अब राख जुस्तजू क्या है।।

🔘
ये रश्क है कि वो होता है हमसुख़न हमसे।
वरना ख़ौफ़-ए-बदामोज़ी-ए-अदू क्या है।।

🔘
रंज से ख़ूगर हुआ इंसाँ तो मिट जाता है रंज।
मुश्किलें मुझ पर पड़ीं इतनी कि आसाँ हो गईं।।

Ghalib Shayari in Hindi Font

🔘 Ishq Ne Galib Nikamma Kar Diya, Warna Ham Bhi Aadami The Kaam Ke..

🔘 Un Ke Dekhe Se Jo Aa Jati Hai Munh Pe Raunak, Wo Samjhate Hai Ki Bimaar Ka Hal Achchha Hain.

🔘 Kaba Kis Muh Se Jaoge “Galib”, Sharm Tum Ko Magar Nahi Aati.

🔘 Dil-E-Nadan Tujhe Hua Kya Hain? Akhir Is Dard Ki Dawa Kya Hai.

🔘 Ishq Par Jor Nahi Hain Ye Aatish “Galib”, Ki Lagaaye Naa Lage Bujhaye Na Bujhe.

🔘 Esharat-E-Katara Hai Dariya Me Fana Ho Jana, Dard Ka Had Se Guzarana Hain Dawa Ho Jana.

🔘 Dil-Se-Teri-Nigah-Jigar-Tak-Utar-Gayi, Dil Se Teri Nigah Jigar Tak Utar Gayi Dil Se Teri Nigah Jigar Tak Utar Gayi, Dono Ko Ek Adaa Me Rajamand Kar Gayi.

🔘 Dard Minnat Kash-E-Dawa N Hua, Main N Achchha Hua Na Bura Hua.

🔘 Aah Ko Chahaiye Ek Umar Asar Hote Tak, Kaun Jeeta Hai Tiri Zulfo Ke Sar Hone Tak.

🔘 Karz Ki Peete The May, Lekin Samjhate The Ki Ha,n, Rang Lavegi Hamari Faka-Masti Ek Din.
Mohabbat Me Nahi Hai Farq Jeene Aur Marane Ka, Usi Ko Dekh Kar Jeete Hai Jis Kafir Pe Dam Nikale.

🔘 Hazaron Khwahishe Esi Ki Har Khwahish Pe Dam Nikale, Bahut Nikale Mire Armaan Lekin Fir Bhi Kam Nikale.

🔘 Hai Aur Bhi Duniya Me Sukun-Var Bahut Achchhe, Kahate Hai Ki “Galib” Ka Hain Andaaz-E-Bayan Aur.

🔘 N Tha Kuchh To Khuda Tha, Kuchh N Hota To Khuda Hota, Duboya Mujh Ko Hone Ne N Hota Main To Kya Hota.

🔘 Dard Jab Dil Me Ho To Dawa Kijiye, Dil Hi Jab Dard Ho To Kya Kijiye?

🔘 Hatho Ki Lakiron Pe Mat Ja E “Galib”, Nasib Unake Bhi Hote Hai, Jinake Hath Nahi Hote.
Vaiz teri Duwaon Me Asar Ho To Masjid Ko Hilake Dekh, Nahi To Do Ghut Pee Aur Masjid Hilata Dekh.

🔘 Nazar Lage N Kahi Usake Dast-O-Baju Ko, Ye Log Kyun Mere Zakhme Jigar Dekhate Hai..
Rahi N Takat-E-Guftaar Aur Agar Ho Bhi, To Kis Ummid Pe Kahiye Ke Aarzoo Kya Hai.

🔘 Piyun Sharab Agar Khum Bhi Dekh Lu Do Char, Ye Shisha-O-Kahad-O-Kuza-O-Subu Kya Hain Rango Me Daudate Firane Ke Ham Nahi Kayal, Jab Ankh Hi Se N Tapaka To Fir Lahu Kya Hai.

🔘 N Shole Me Ye Larishma N Barq Me Ye Adaa, Koi Batao Ki Wo Shokhe-Tandukhu Kya Hain.

🔘 Huyi Muddat Ki “Galib” Mar Gaya Par Yaad Aata Hai, Wo Har Ek Baat Pe Kahata Ki Yun Hota To Kya Hota.

🔘 Tere Wade Par Jiye Ham, To Yah Jaan, Jhuth Jana, Ki Khushi Se Mar N Jate, Agar Etbaar Hota.

🔘 Hamko Malum Hai Zannat Ki HAQIQAT Lekin, Dil Ke Khush Rakhane Ke “Galib” Ye Khyaal Achchha Hain.

🔘 Rekhte Ke Tumhi Ustaad Nahi Ho “Galib”, Kahate Hai Agale Zamaane Me Koi Meer Bhi Tha
Koi Mere Dil Se Puchhe Tere Teer-E-Neem-Kash Ko, Ye Khalish Kaha Se Hoti Jo Jigar Ke Paar Hota.

🔘 Bas-KI-Dushwaar Hai Har Kaam Ka Aasaan Hona, Aadami Ko Bhi Mayassar Nahi Insaan Hona.

🔘 Yahi Hai Aazamana To Satana Kisko Kahate Hai, Adu Ke Ho Liye Jab Tum To Mera Inthaan Kyu Ho.

🔘 Tum N Aaye To kya Sahar N Huyi, Han Magar Chain Se Basar N Huyi, Mera Nala Suna Zamane Ne, Ek Tum Ho Jise Khabar N Huyi.

🔘 Hua Jab Gham Se Yun Behish To Gham Kya Sar Ke Katane Ka, Na Hota Gar Juda Tan Se To Jahanu Par Dhara Hota.

🔘 Har Ek Baat Pe Kahate Ho Tum Ki Tu Kya Hai, Tumhi Kaho Ki Ye Andaaz-E-Guftagu Kya Hain.

🔘 Wo Chiz Jisake Liye Hamako Ho Bahisht Azez, Siwaye Bada-E-Gulfaam-e-E-Mushkabu Kya Hai.

🔘 Ye Ham Jo Hizr Me Deewaar-O-Dar Ko dekhate Hai, Kabhi Saba Ko, Kabhi Namaabar Ko Dekhate Hai.

🔘 Wo Aaye Ghar Me Hamare, Khuda Ki Kudarat Hai, Kabhi Ham Unako Kabhi Apane Ghar Ko Dekhate Hain.

🔘 Nikalana Khuld Se Adam Ka Sunate Aaye Hai Lekin, Bahut Be-Aabaru Ho Kar Kire Kunche Se Ham Nikale.

🔘 Kaha May-Khane Ka Darwaza “Galib” Aur Kaha Vayiz, Par Itana Janate Hain Kal Wo Jata Tha Ki Ham Nikale.

🔘 Bana Hai Shah Ka Musaahib Fire Hai itraana, Vagana Shahar Me “Galib” Ki Abaru Kya Hai.

🔘 Jula Hai Zism Janha Dil Bhi Jal Gaya Hoga, Kudarate Ho Jo Ab Raakh Justaju Kya Hain.

🔘 Ye Rashk Ki Wo Hota Hai Hamsukhan Hamase, Warana Khuf-E-Bdamoji-E-Adu Kya Hai.

🔘 Ye N Thi Hamari Kisamat Ki Visaal-E-Yaar Hota, Agar Aur Jeete Rahate Yahi Intizaar Hota.

🔘 Ranj Se Khugar Hua Insaan To Mit Jata Hain Ranj, Mushkile Mujh Par Padi Itani Ki Asaan Ho Gayi.

आशा करता हूँ आप सभी ग़ालिब के दीवाने दोस्तों को 45+ Mirza Ghalib Shayari – Ghalib Shayari in Hindi Font पोस्ट बेहद ही होगा

Leave a Comment